तुम बनो,
मशाल बनो
*अब एक मिसाल बनो*
बेरंग स्याही की पहली आहट से बचपन के खिलौने सी
सोने की चिड़िया तक
भारत की तस्वीर से
आज की नारी तक
बदल गई तुम भी
*सभी का जिक्र होता है*
समय का फेर है
कैसी यह है कल्पनाओं का बीज लिए
*अपने पथ पर चलता पथिक*
ना भुला पाएंगे ए बेरंग स्याही तुझे हम
काव्य संग्रह की व्यथा ने दुखित किया मेरा मन
देखा ना तुझे था कभी, फिर भी तुम हमारे पास हो
याद रखेंगे सदा तुम्हें,दिल के पास हो
दिल पर, काव्य संग्रह ने जो छाप छोड़ी है
आज फिर लिखने को मन बोला है
आज नमन है मेरा भी तेरी काव्य संग्रह पर
*नमन श्रद्धांजलि कवि तरूण जोशी को समर्पित*
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मनोज पुरोहित
