ब्यूरो रिपोर्ट सहारनपुर उत्तर प्रदेश:
शैक्षिक आगाज द्वारा आयोजित कलाकृति कार्यक्रम के तीसरे दिवस में उड़ीसा की पट्ट चित्रकारी की बारीकियों को शिक्षकों के सम्मुख प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड राज्य के समग्र शिक्षा अभियान के डिप्टी डायरेक्टर श्री आकाश सारस्वत जी ने की और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा की प्रत्येक छात्र में छुपी हुई कला के पृष्ठ पोषण का कार्य एक शिक्षक से बेहतर कोई और नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कला जीवन का आधार है और कलात्मक दृष्टिकोण के जरिए एक छात्र को शिक्षित बनाने से एक संवेदनशील राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने उपस्थित सभी शिक्षकों से अपने अपने क्षेत्र विशेष एवं अन्य क्षेत्रों की विलुप्त हो रही लोक कलाओं को बचाने के लिए और उनका परिचय छात्रों से कराने के लिए विशेष आग्रह किया। शैक्षिक आगाज़ के इस प्रयास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा भारत के सुदूर कोनों से अलग-अलग लोक कलाकारों को एक मंच पर एकत्रित करना बहुत आसान नहीं होता लेकिन सरकारी अध्यापकों का यह स्वैच्छिक समूह इस कार्य को समय समय पर बखूबी अंजाम देता है। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण लगभग 2 घंटे तक चला जिसमें सभी शिक्षकों ने पट्ट चित्रकारी की बारीकियों को समझा, रंग बनाने की विधि, प्राकृतिक रंगों से चित्रण के साथ-साथ चित्रित कृतियों के पीछे छुपे भावों की गेय शैली में अभिव्यक्ति के बारे में भी बहुत गहनता से चर्चा परिचर्चा की गई। मास्टर ट्रेनर की भूमिका में पश्चिमी बंगाल के श्री रहीम चित्रकार एवं मीनू चित्रकार की जोड़ी रही। जिन्होंने देवी दुर्गा आराधना से कार्यक्रम को आरंभ करते हुए भगवान राम, भगवान कृष्ण के जीवन चरित्र पर उकेरी हुई अपनी रचनाओं और चित्रों का प्रदर्शन सभी के समक्ष किया। पट्ट चित्रकारी को आधुनिक समय में सार्थक बनाते हुए उन्होंने कोरोना काल पर बनाई गई अपनी चित्रकारी और गीत को भी प्रस्तुत किया। पट्टी चित्रकारी मूल्य तय है उड़ीसा से जानी जाती है परंतु पश्चिमी बंगाल, राजस्थान के साथ-साथ बांग्लादेश में भी यह कला एक लोक कला के रूप में सुदृढ़ता से अपना स्थान बनाए हुए हैं। सनातन धर्म के सभी हिंदू देवी देवताओं के जीवन चरित्र और उनकी प्रशंसा में गाए जाने वाले गीतों के माध्यम से यह लोक कला धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिरों में अपनी विशेष पहचान बनाए रखे हुए हैं। कार्यक्रम में बबीता यादव अनीता यादव , सुनीता बहुगुणा , कृपाल सिंह शीला एवं सत्यनारायण शर्मा ने अपने विचारों को साझा किया। कार्यक्रम का संचालन उत्तर प्रदेश सहारनपुर से स्मृति चौधरी एवं बहराइच से श्री पूरन लाल चौधरी जी के द्वारा किया गया। स्मृति चौधरी द्वारा सभी उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ-साथ लिटिल हेल्प ट्रस्ट की संस्थापक समृद्धि चौधरी एवं राष्ट्रीय संयोजक सुश्री सृष्टि चौधरी जी का भी विशेष आभार व्यक्त किया गया जिनके कारण यह कार्यक्रम सफलता की ऊंचाइयों को पा सका है।

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