ब्यूरो रिपोर्ट देहरादून:
आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर पंचायती राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग एवं वन अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के सभागार में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर पंचायती राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग एवं वन अनुसंधान संस्थान द्वारा संयुक्त रुप से पंचायत प्रतिनिधियों एवं कार्मिकों के राज्य स्तरीय एक दिवसीय अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पंचायती राज एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने कहा की हम ऐसे वृक्षों को ग्रामसभा स्तर पर लगाने का प्रयास करें जिनके द्वारा कम समय में उससे अधिक आए हो सके। उन्होंने कहा कि जल संवर्धन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए अनेक प्रजाति के वृक्ष लगाये जा सकता हैं। पंचायतराज मंत्री ने कहा कि पिरूल से कपड़ा बनाने का कार्य पंचायतें कर सकती हैं। पानी के स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए चाल-खाल को बनाने के लिए मनरेगा के तहत पंचायत स्तर पर कार्य किया जा सकता है,पंचायतराज मंत्री महाराज ने कहा कि हमें प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना है और इसके लिए सभी के आपके सहयोग की आवश्यकता है,उन्होंने कहा कि अनुपयोगी भूमि को उपयोग में लाने के साथ-साथ गांव की आय को किस प्रकार से बढ़ाया जाए इस विषय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह लगातार प्रयासरत हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हम भी लगातार सशक्त विकल्पों की तलाश में लगे हैं। किसानों की फसल को जंगली जानवर हानि न पहुंचाएं इसके लिए सरकार सीड बॉल का प्रयोग करने जा रही है, जिसमें फलों के बीज रखकर उनको विभिन्न माध्यमों से रोपित किया जाएगा। उस रोपित बीज से जब पेड़ों पर फल लगेगें तो जंगली जानवर जंगलों से आबादी की ओर नहीं आ पाएंगे।
महाराज ने कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने के साथ-साथ अनुपयोगी भूमि के उपयोग और ग्राम सभा की आय बढ़ाने के विषयों पर चर्चा के साथ-साथ अन्य विषयों पर विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के विचार जानने के लिए शीघ्र ही हरिद्वार में एक विशाल सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के सभी ग्राम सभाओं के प्रधान, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को बुलाया जाएगा।इस अवसर पर उत्तराखंड के विभिन्न विकासखंड से आए ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित सचिव पंचायती राज नितेश झा, निदेशक बंशीधर तिवारी, संयुक्त निदेशक राजीव कुमार नाथ, उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी, वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ रेनू सिंह, पानी रखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती, भारतीय ग्रामोत्थान संस्थान के अनिल चंदोला, जलागम परियोजना निदेशक नीना ग्रेवाल और डॉ मनोज पंत आदि मौजूद थे।

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