व्यूरो रिपोर्ट:गोपेश्वर चमोली की संस्था अक्षत नाट्य मंच द्वारा दिवंगत कवि तरुण जोशी के काव्य संग्रह का विमोचन समारोह देहरादून जो सुभारम्भ वाटिका में आयोजित किया गया ,तरुण जोशी का जन्म 29 अप्रैल 1992 को चमोली जिले के नंदप्रयाग में हुआ दीवाली से ठीक 2 दिन पूर्व धनतेरस के दिन 2 नवम्बर 2021 को तरुण जोशी इस दुनिया को अलविदा कह गए। द्वारहाट के एम डी तिवारी शिक्षा निकेतन से हाइस्कूल व राजकीय इंटर कॉलेज द्वारहाट से इंटर पास करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से करने के बाद एम बी ए किया।बचपन से ही कविताओं में उनका शौक था, बाल प्रहरी में भी उनकी कविताएं छपी।
उनके द्वारा लिखी कविताएं वेरंग स्याही,सूरज और अंधेरा ,दरिया,बेटी बन वापस न आऊंगी जैसे 20 कविताओं का संग्रह उन्होंने लिखा,समाज मे व्याप्त भ्रष्टाचार से वे बहुत व्यथित थे इसीलिए उनका सपना आई ए एस बनकर समाज सेवा करना था लेकिन नियति को शायद मंजूर नही था,उनकी माता का आशा जोशी,व पिता कागणेश दत्त जोशी बताते हैं कि तरुण खेलों के साथ साथ तरह तरह के व्यंजनों का शौकीन भी था तरुण के भाई ईशान जोशी बताते हैं कि उनका भाई भले ही शारीरिक रूप से उनके साथ नहीं है लेकिन उनकी यादों में वे अभी भी जिंदा है,पुस्तक प्रकाशन में तरुण के पारिवारिक सदस्यों का भी योगदान रहा जिसमें
विजय वशिष्ठ(मौसाजी, अक्षत नाट्य संस्था के डायरेक्टर ) कुसुम वशिष्ठ(मौसी), आयुष वशिष्ठ(भाई), शसुशील पुरोहित एवम समस्त अक्षत परिवार, बीना बेंजवाल(मौसी, वरिष्ठ कवियत्री) व रमाकांत बेंजवाल, श्री धीरेन्द्र सती(मामा),भूपेश सती(मामा), मुन्नी उपाध्याय(ताईजी) व दिवंगत तरुण के सभी दोस्त शामिल रहे।
